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Ratri Bhojan      
 
रात्री भोजनसे हानियां

ज्ञानी भगवंत रात्री भोजन को तिर्यंच - नरक का आश्रव व्‍दार कहते हैं|
शरीर रोगी,आलसी बनता है और मनमें विकार पैदा होते है|
नरक गति असाता वेदनीय आदि अशुभ कर्म बंधते है|
तिर्यंच गति में पराधिनता व कत्‍तलखानेमे कट जाना पडता है|
ध्यान,आत्मचिंतन,स्‍वाध्याय में बाधा उत्‍पन्‍न होकर स्‍मरण शक्‍ति कमजोर होने लगती है|
मानवीय प्रवृत्‍तियाँ तामसिक प्रवृत्‍तियो में बदलने लगती है|
पाचन संबधी अनेक रोग पैदा होने लगते है|
मधुमेह (डायबेटीस), मोटापा (ओबेसिटी) अँसेडिटी आदि रोग पैदा होने लगते है| इसका मुख्‍य कारण रातमें सुर्य के गर्मी का अभाव है|

रात्री भोजन आरोग्य के साथ वैज्ञानिक, आध्‍यात्‍मिक, सामाजिक एवं परिवारिक दृष्‍टिकोनसे अनुपयोगी (घातक) हैं, हानिकारक है,प्रकृती विरूध्‍द है|

रात्री भोजन के त्‍यागसे लाभ:

जिसका पालन करने से महीने में १५ उपवास का लाभ होता है|
प्रतिक्रमण - स्‍वाध्‍याय - ध्‍यान आरामसे हो सकते है|
आत्मा अनेक पापोंसे बच जाती है|
मै जैन हूँ, ऐसे गौरव की अनुभूति होती है|
मनुष्‍य भव पाप करनेके लिये नही बल्‍कि पुण्‍य करनेके लिये मिला है|
रातके वक्‍त भोजन में जू, गिरने से जलोदर,मक्‍खीसे उल्‍टी, चींटीसे बुध्‍दि का नाश, मकडी के जाल से कोढ, विषौले जन्‍तुऔंकी लारसे मृत्‍यू, लकडी की फांस आनेसे तलवा छिद जाता है, बाल आनेसे स्‍वरभंगसे उल्‍टी व दस्‍ते होती है| शरीर अस्‍वस्‍थ होकर आलस बढता है|

८४ लाख योनि में जन्‍म - मरणका चक्र चलता रहेगा|अज्ञान पाप कारक है ज्ञान पाप निवारक है|ज्ञानी बनिये पाप छोडीये| धर्म आदरीये यही एकान्‍त मुक्‍ति एवं सुख शांती का श्रेष्‍ठ मार्ग है|

अतः स्‍वास्‍थ प्रेमियों के लिये त्यागने योग्‍य है| इस लिये यथा संभव दिनमें ही सुर्यास्‍त के पहले भोजन करनेका प्रयास करना चाहिये | रात्रि भोजन न करना यह जैनियोंकी आज भी पहचान बनी हुई है|अतः इसे बरकरार रखना आप सभी का परम कर्तव्‍य है|
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