मंगलमय भगवान् वीर हैं, मंगलमय गौतम स्वामी|
मंगलमय है सदा अहिंसा, जैन धर्म जग में नामी ||
हे प्रभुवीर दया के सागर, सब गुण आगर ज्ञान उजागर|
जब तक जीऊँ,
सत्य अहिंसा का रस पीऊँ,
छोडूँ लोभ घमंड बुराई, चाहूँ सब की नित्य भलाई|
जो करना सो अच्छा करना, फिर दुनियाँ में किससे डरना|
हे प्रभु मेरा हो मन-सुन्दर, वाणी सुन्दर जीवन सुन्दर|| |