E-Learning » Examination - 01 » Chapter 06

Kavita (Poems) » Navkar Mantra Hai Mahamantra

माहामंत्र स्तुति      
 

नवकर मंत्र है माहामंत्र इस मंत्र की महिमा भारी है | ||ध्रु||
आगम में कही गुरुवर से सुनी, अनुभव में जिसे उतरी है |
अरिहंताणं पद पहला है, अरि आरती दूर भगाता है |
सिद्धाणं सुमिरन करने से, मनवांछित सिद्ध पाता है |
आयरीयाणं तो अष्ट सिद्धि, नव निधी के भंडारी है ||१||

उवज्झायाणं अज्ञानतिमीर हर, ज्ञानप्रकाश फैलता है |
स्व्व साहुणं सब सुखदाता, तन मन को स्व्स्थ बनाता है |
पद पांच के सुमिरण करने से, मिट जाती सकल बिमारी है ||२||

श्रीपाल सुदर्शन मेणरया, जिसने भी जपा आनन्द पाया |
जीवन के सू पतझड में, फिर फूल खिले सौरभ छाया |
मन नंदन वन मे रमन करे, यह ऍसे मंगलकारी है ||३||

नित नई बधाई सुने कान, लक्ष्मी वरमाला पहनाती है |
"अशोक मुनी" जय विजय मिले, शांती प्रसन्नता बढ जाती है |
स्न्मान मिले स्त्कार मिले, भवजल से नैया तारी है ||४||

 

 
Copyright 2010. Trakjain.com. All Rights Reserved. Home   |    About Us   |    Events   |    E-Learning   |    Contact Us   |    Help Site Designed by Kairee.