| मुल |
अर्थ |
| भगवं |
हे भगवन् ! हे गुरु महाराज ! |
| इच्छाकारेणं |
इच्छापूर्वक |
| संदिसह |
आज्ञा दीजिये (कि मैं) |
| इरियावहियं |
ईर्यापथिकी क्रिया का (चलने आदि से लगने वाली क्रिया का) |
| पडिक्कमामि |
प्रतिक्रमण करुं |
| (गुरुजनों की ओर से आज्ञा मिल जाने पर या अपने संकल्प से ही आज्ञा सीकार करके साधक कहता है -) |
| इच्छं |
आपकी आज्ञा प्रमाण है |
| इच्छामि |
इच्छा करता हूं |
| पडिक्कमिउं |
प्रतिक्रमण करने की |
| इरियावहियाए |
मार्ग में चलने से होने वाली |
| विराहणाए |
विराधना से |
| (विराधना किस तरह होती है?) |
| गमणागमणे |
जाने आने में |
| पाणक्कमणे |
किसी प्राणी को दबाया हो |
| बीयक्कमणे |
बीज को दबाया हो |
| हरियक्कमणे |
हरी वनस्पति को दबाया हो |
| ओसा |
ओस |
| उत्तिंग |
कीड़ी नगर |
| पणग |
पांच रंग की काई (लीलन फूलन) |
| दग |
कच्चा पानी |
| मट्टी |
सचित्त मट्टी (और) |
| मक्कडासंताणा |
मकड़ी के जालों को |
| संकमणे |
कुचला हो |
| मे |
मैंने |
| एगिंदिया |
एक इन्द्रिय वाले |
| बेइंदिया |
दो इन्द्रिय वाले |
| तेइंदिया |
तीन इन्द्रिय वाले |
| चउरिंदिया |
चार इन्द्रिय वाले |
| पंचिंदिया |
पांच इन्द्रिय वाले |
| जे |
जो |
| जीवा |
जीव हैं (उन्हें) |
| विराहिया |
पीड़ित किया हों (विराधना की हो) |
| (किस तरह पीड़ित किये हों) |
| अभिहया |
सम्मुख आते हुए को हना हो |
| वत्तिया |
धूल आदि से ढंका हो |
| लेसिया |
मसला हो |
| संघाइया |
इकट्ठा करना |
| संघट्टिया |
संघट्ट (छूआ) किया हो |
| परियाविया |
परिताप (कष्ट) पहुंचाया हो |
| किलामिया |
किलामना उपजाई हो, मृततुल्य किया हो |
| उद्दविया |
उद्वेग उपजाया हो या भयभीत किया हो |
| ठाणाओ |
एक स्थान से |
| ठाणं |
दूसरे स्थान पर |
| संकामिया |
रखा हो |
| जीवियाओ |
जीवन से |
| ववरोविया |
रहित किया हो |
| तस्स |
उसका |
| दुक्कडं |
पाप |
| मि |
मेरा |
| मिच्छा |
मिथ्या (निष्फल) हो |