जन-जन के श्रध्दा केंद्र राष्ट्रसन्त आचार्य सम्राट पू.श्री आनंदऋषिजी म.सा. की दीक्षाभूमि,,आनंद कुल कमल दिवाकर महाराष्ट्र प्रवर्तक पू.श्री कुंदनऋषिजी म.सा. की जन्मभूमि एवं दीक्षाभूमि मिरी गाँवमें यहाँ एक दो नहीं किंन्तु आज तक १४ दीक्षाएँ हुई है|उस पवित्र भूमिमें प्रवर्तक श्री कुंदनऋषिजी म.सा. की प्रेरणा से करीब ५ वर्ष पूर्व 'श्री गुरु आनंद गौशाला' की स्थापना हुई है|
संसार में सभी जीव जीना चाहते है,मरना कोइ नहीं|अहिंसा को सभी धर्मों ने महत्व दिया है एवं धर्म माना है|जीवों की रक्षा करना यही धर्म है,उन्हें मारना,कष्ट देना,पीडा पहुँचाना ही अधर्म है|
भारतीय ऋषि मुनियों ने गोमाता को बहुत ही महत्व दिय है,गो-हत्या को महापाप मना हैं|हमरे तीर्थंकर नेमिनाथ,पार्श्वनाथ भगवान ने जीवों की रक्षा के लिये राजपाट को ठुकराकर सन्यास मार्ग पर चल पडे थे|राजा रघुने गौरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने की तैयारी की थी| माता तो कुछ कालके लिए ही दुध पिलाती है,किन्तु गौमाता जन्मसे ही मृत्यु तक दुध पिलाती है|
अतः गौमाता का पुरातन कालसे बहुत ही बडा महत्व है|
आचार्य भगवंत करुणा के सागर थे|उनकी भावना को साकार रुप देने के लिए ही गौशाला की स्थापना हुयी है|सन २००३ से २००४ के अकाल में इस संस्था ने सफल छावणी चलाकर करीब ३ हजार गायों को अभयदान देकर बहुत बडे पुण्य का उपार्जन किया है|आज भी करीब २०० पशु जो कत्लखाने में जाने के मार्ग पर थे,उनकी सुरक्षा की ,उन्हें अभय दान दिया,उनका भरण-पोषण हो रहा है|इस संस्था की आर्थिक स्थिति कमजोर है,प्रतिदिन का करिब ५०००/- रु से अधिक का खर्च है|
पशुओं के चारे के लिए कुछ जमीन एवं १ ट्रँक्टर-ट्रँली आदि की जरुरत है|उसी तरह चार शेड बने है|दो गोडाऊन एवं कर्मचारियों के लिये क्वार्टर बने है|फिर भी चार-पाच शेड आदि बनाकर इस गौशाला को आधुनिक रुप देना,देसी गायों का विकास करने का लक्ष्य भी है|अतः अहिंसा प्रेमी जीवदया को महत्व देनेवाले श्रध्दालू भक्तों को निवेदन है कि इस संस्था को आर्थिक सहयोग देकर परिपुष्ट करे| |