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| "Shri Guru Anand Goshala" |
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| गुरुदेव नित्य नियम » सती स्तोत्र का पाठ |
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| सती स्तोत्र का पाठ |
आदौ सती सुभद्रा च ,पातु पश्चातु सुन्दरी |
ततश्चंदनबाला च, सुलसा च मृगावती | | १ | |
राजीमती ततश्चुला, दमयंती तत: परम |
पद्मावती शिवा सीता , ब्राम्ही पुनश्च द्रौपदी | | २ | |
कौशल्या च तत: कुंती , प्रभावती सतिवरा |
सतिनामिन यंत्रॉय , चतुस्त्रिशंत समुदभव: | | ३ | |
यस्य पार्श्वे सदायंत्रो,वर्तते तस्य साम्प्रतं |
भूरि निद्रा न चायाति, नयान्ति भुतप्रेतका: | | ४ | |
ध्वजायं नृपतेर्यस्य , यंत्रोयं वर्तते सदा |
तस्य शत्रुभयं नास्ति , संग्रामेस्य जय: सदा | |५ | |
गृहद्वारे सदा यस्य , यंत्रोयं ध्रियते वर: |
कार्मनादिक तन्त्रस्य , न स्यात्तस्य पराभव : | | ६ | |
स्तोत्रं सतीनां सुगुरु प्रसादत्
कृतं मयोद्योत मृगाधिपेन |
य: स्तोत्र मेतत् पठति प्रभाते ,
स प्राप्नुते शं सततं मनुष्य: | | ७ | |
| | इति श्री सती स्तोत्रं सम्पूर्णम् | | |
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